लेबनान के खिलाफ जंग के 2 महीने बाद ही संघर्ष विराम स्वीकार करने के बाद ज़ायोनी हलकों में चिंता फैली हुई है जबकि दक्षिणी लेबनान में लोगों के बीच गज़ब का उत्साह है।
लेबनान में युद्धविराम की शुरुआत के साथ ही दक्षिणी लेबनन, ज़ाहिया, बेकाअ और बेरूत के उपनगरों के लोगों सहित विभिन्न क्षेत्रों से शरणार्थी अपने घरों को लौटने लगे।
लेबनान और ज़ायोनी शासन के बीच युद्धविराम समझौता, बेरूत समयानुसार सुबह 4:00 बजे लागू हो गया है। इस समझौते पर हिज़्बुल्लाह की राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख ने हिज़्बुल्लाह की मांगों पर अमल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इस समझौते के बारे में ज़ायोनी मीडिया में कुछ बातें गलत पेश की जा रही हैं।
"महमूद क़माती" ने स्पष्ट किया कि हिज़्बुल्लाह को नेतन्याहू के वादों पर भरोसा नहीं है और वह उनके जाल में नहीं फँसेगा।अरबी 21 की रिपोर्ट के अनुसार, महमूद कमाती ने कहा कि नेतन्याहू के युद्धविराम समझौते के पालन के बारे में हमारे संदेह का कारण यह है कि हमें हमेशा अवैध राष्ट्र के द्वारा धोखा मिला है।
इसी बीच ज़ायोनी मीडिया ने लेबनानी लोगों की दक्षिण में वापसी की वायरल तस्वीरों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह हिज़्बुल्लाह की पूर्ण जीत है। युद्धविराम के बाद लेबनानी पक्ष द्वारा जारी तस्वीरें दक्षिण की ओर लेबनान वासियों की वापसी को दिखाती हैं। इसका मतलब पूर्ण विजय है। दूसरी तरफ उत्तरी फिलिस्तीन में बसने वालो ज़ायोनियों की अपने घरों को लौटने वाली तस्वीरें क्यों नहीं हैं ?
69 ज़ायोनी नागरिकों का मानना है कि अवैध राष्ट्र को इस जंग मे हिज़्बुल्लाह के सामने हार का सामना करना पड़ा है। नेतन्याहू द्वारा युद्धविराम को स्वीकार करने के बाद, ज़ायोनी सेना लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों से हट गई है, और दक्षिणी लेबनान के लोग अपने शहरों और घरों में लौट रहे हैं।
जाने-माने अरब विश्लेषक और रायुल यौम के संपादक अब्लदुबारी अतवान ने एक विश्लेषण में कहा कि इतिहास में पहली बार, यह जीत हिज़्बुल्लाह के नायकों द्वारा हासिल की गई, मक़बूज़ा फिलिस्तीन के शहरों पर 350 से ज्यादा रॉकेट गिरे, ये बड़ी जीत है; ज़ायोनी राष्ट्र, डूब रहा था और वह हार रहे थे, इसलिए तुरंत समझौते पर सहमत हो गए।